
ग्राम श्री
Gram Shri
Sumitranandan Pant
13 verses · ~60 lines · 3 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Shringara
Bathue Ki Patti, Munge Jaisi Bal
Jagdish Gupta8 verses · ~1 min
पौधों में उभरा सीताओं का रूप पछुआ के झोंकों से हिल उठती धूप
बैंगनी-सफ़ेद बूटियों की हिलकोर पीले फूलों वाली छींट सराबोर
ओस से सनी चिकनी मिट्टी की गंध पाँवों की फिसलन बन जाती निर्बन्ध
शब्द-भरी नन्हीं चिड़ियों की बौछार लहराकर तिर जाती आँखों के पार
मेड़ के किनारे पगडंडी के पास अनचाहे उग आती अजब-अजब घास
इक्का-दुक्का उस हरियाली के बीच कुतरती गिलहरी, फिर-फिर दानें खींच
पकने में होड़ किए गेहूँ की बाल बथुए की पत्ती मूंगे जैसी लाल ।
बथुए की कच्ची पत्ती हरी होती है,पर पकने पर वह एकदम लाल हो जाती है ।
इति

Paired Painting
Woman with Water Pot
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Bathue Ki Patti, Munge Jaisi Bal carries.