
उस शाम वो रुख़सत का समा
Us Shaam Vo Rukhsat Ka Sama
Ibn-e-Insha
6 verses · ~11 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Shringara
Us Shaam Vo Rukhsat Ka Samaan Yaad Rahega
Ibn-e-Insha8 verses · ~1 min
उस शाम वो रूख़्सत का समाँ याद रहेगा वो शहर वो कूचा वो मकाँ याद रहेगा
वो टीस कि उभरी थी इधर याद रहेगी वो दर्द कि उट्ठा था यहाँ याद रहेगा
हम शौक़ के शोले की लपक भूल भी जाएँ वो शम-ए-फ़सुर्दा का धुआँ याद रहेगा
हाँ बज़्म-ए-शबाना में हमा शौक़ जो उस दिन हम थे तिरी जानिब निगराँ याद रहेगा
कुछ ‘मीर’ के अबयात थे कुछ ‘फ़ैज़’ के मिसरे इक दर्द का था जिन में बयाँ याद रहेगा
आँखों में सुलगती हुई वहशत के जिलू में वो हैरत ओ हसरत का जहाँ याद रहेगा
जाँ-बख़्श सी उस बर्ग-ए-गुल-ए-तर की तरावत वो लम्स अज़ीज़-ए-दो-जहाँ याद रहेगा
हम भूल सके हैं न तुझे भूल सकेंगे तू याद रहेगा हमें हाँ याद रहेगा
इति

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Us Shaam Vo Rukhsat Ka Samaan Yaad Rahega carries.