№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

Loading the archive

MM · XXVI

Canvas
Stolen Interview

Shringara

उस शाम वो रूख़्सत का समाँ याद रहेगा

Us Shaam Vo Rukhsat Ka Samaan Yaad Rahega

Ibn-e-Insha
1 min read 8 versesविदाईdepartureयाद

8 verses · ~1 min

उस शाम वो रूख़्सत का समाँ याद रहेगा वो शहर वो कूचा वो मकाँ याद रहेगा

वो टीस कि उभरी थी इधर याद रहेगी वो दर्द कि उट्ठा था यहाँ याद रहेगा

हम शौक़ के शोले की लपक भूल भी जाएँ वो शम-ए-फ़सुर्दा का धुआँ याद रहेगा

हाँ बज़्म-ए-शबाना में हमा शौक़ जो उस दिन हम थे तिरी जानिब निगराँ याद रहेगा

कुछ ‘मीर’ के अबयात थे कुछ ‘फ़ैज़’ के मिसरे इक दर्द का था जिन में बयाँ याद रहेगा

आँखों में सुलगती हुई वहशत के जिलू में वो हैरत ओ हसरत का जहाँ याद रहेगा

जाँ-बख़्श सी उस बर्ग-ए-गुल-ए-तर की तरावत वो लम्स अज़ीज़-ए-दो-जहाँ याद रहेगा

हम भूल सके हैं न तुझे भूल सकेंगे तू याद रहेगा हमें हाँ याद रहेगा

इति

Ibn-e-Insha

The Poet

इब्ने इंशा

Ibn-e-Insha

Stolen Interview

Paired Painting

Stolen Interview

Open the viewer →

If this held you

Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Us Shaam Vo Rukhsat Ka Samaan Yaad Rahega carries.