№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Shantanu and Ganga

Karuna

किस को पार उतारा तुम ने किस को पार उतारोगे

Kis Ko Par Utara Tum Ne Kis Ko Par Utaroge

Ibn-e-Insha
1 min read 6 versesमल्लाहboatmanभँवर

6 verses · ~1 min

किस को पार उतारा तुम ने किस को पार उतारोगे मल्लाहो तुम परदेसी को बीच भँवर में मारोगे

मुँह देखे की मीठी बातें सुनते इतनी उम्र हुई आँख से ओझल होते होते जी से हें बिसारोगे

आज तो हम को पागल कह लो पत्थर फेंको तंज़ करो इश्क़ की बाज़ी खेल नहीं है खेलोगे तो हारोगे

अहल-ए-वफ़ा से तर्क-ए-ताल्लुक़ कर लो पर इक बात कहें कल तुम इन को याद करोगे कल तुम इन्हें पुकारोगे

उन से हम से प्यार का रिश्ता ऐ दिल छोड़ो भूल चुको वक़्त ने सब कुछ मेट दिया है अब क्या नक़्श उभारोगे ष्

‘इंशा’ को किसी सोच में डूबे दर पर बैठे देर हुई कब तक उस के बख़्त के बदल अपने बाल सँवारोगे

इति

Ibn-e-Insha

The Poet

इब्ने इंशा

Ibn-e-Insha

Shantanu and Ganga

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Shantanu and Ganga

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Kis Ko Par Utara Tum Ne Kis Ko Par Utaroge carries.