№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

Loading the archive

MM · XXVI

Canvas
Parvati and the Bania's Son

Hasya

सरकार कहते हैं

Sarkar Kahte Hain

Gopal Prasad Vyas
2 min read 5 versesहास्यhumorसरकार

5 verses · ~2 min

बुढ़ापे में जो हो जाए उसे हम प्यार कहते हैं, जवानी की मुहब्बत को फ़कत व्यापार कहते हैं। जो सस्ती है, मिले हर ओर, उसका नाम महंगाई, न महंगाई मिटा पाए, उसे सरकार कहते हैं।

जो पहुंचे बाद चिट्ठी के उसे हम तार कहते हैं, जो मारे डॉक्टर को हम उसे बीमार कहते हैं। जो धक्का खाके चलती है उसे हम कार मानेंगे, न धक्के से भी जो चलती उसे सरकार कहते हैं।

कमर में जो लटकती है, उसे सलवार कहते हैं, जो आपस में खटकती है, उसे तलवार कहते हैं। उजाले में मटकती है, उसे हम तारिका कहते, अंधेरे में भटकती जो, उसे सरकार कहते हैं।

मिले जो रोज बीवी से, उसे फटकार कहते हैं, जिसे जोरू नहीं डांटे, उसे धिक्कार कहते हैं। मगर फटकार से, धिक्कार से भी जो नहीं समझे, उसे मक्कार कहते हैं, उसे सरकार कहते हैं।

सुबह उठते ही बिस्तर से 'कहां अखबार' कहते हैं, शकल पर तीन बजते 'चाय की दरकार' कहते हैं। वे कहती हैं, 'चलो बाजार' हंसकर शाम के टाइम, तो हम नज़रें झुकाकर 'मर गए सरकार' कहते हैं।

इति

Gopal Prasad Vyas

The Poet

गोपालप्रसाद व्यास

Gopal Prasad Vyas

Parvati and the Bania's Son

Paired Painting

Parvati and the Bania's Son

Open the viewer →

If this held you

Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Sarkar Kahte Hain carries.