№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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The Nati Folk Dance of Himachal

Hasya

भाषण दो! भई, भाषण दो!!

Bhashan Do, Bhai, Bhashan Do

Gopal Prasad Vyas
2 min read 4 versesहास्यhumorभाषण

4 verses · ~2 min

यदि दर्द पेट में होता हो या नन्हा-मुन्ना रोता हो या आँखों की बीमारी हो अथवा चढ़ रही तिजारी हो तो नहीं डाक्टरों पर जाओ वैद्यों से अरे न टकराओ है सब रोगों की एक दवा- भई, भाषण दो! भई, भाषण दो!!

हर गली, सड़क, चौराहे पर भाषण की गंगा बहती है, हर एक समझदार नर-नारी के कानों में कहती रहती है- मत पुण्य करो, मत पाप करो, मत राम-नाम का जाप करो, कम-से-कम दिन में एक बार- भई, भाषण दो! भई, भाषण दो!!

भाषण देने से सुनो, स्वयं नदियों पर पुल बंध जाएंगे बंध जाएंगे बीसियों बाँध ऊसर हजार उग आएंगे। तुम शब्द-शक्ति के इस महत्व को मत विद्युत से कम समझो। भाषण का बटन दबाते ही बादल पानी बरसाएंगे।

इसलिए न मैला चाम करो दिन-भर-प्यारे, आराम करो! संध्या को भोजन से पहले छोड़ो अपने कपड़े मैले, तन को संवार, मन को उभार कुछ नए शब्द लेकर उधार प्रत्येक विषय पर आँख मूंद- भई, भाषण दो! भई भाषण दो!!

इति

Gopal Prasad Vyas

The Poet

गोपालप्रसाद व्यास

Gopal Prasad Vyas

The Nati Folk Dance of Himachal

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The Nati Folk Dance of Himachal

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Bhashan Do, Bhai, Bhashan Do carries.