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प्रथम प्यार के चुम्बन की तरह
Pratham Pyar Ke Cumban Ki Tarah
Gopaldas 'Neeraj'
6 verses · ~12 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

6 verses · ~2 min
बादलों से सलाम लेता हूँ वक्त क़े हाथ थाम लेता हूँ सारा मैख़ाना झूम उठता है जब मैं हाथों में जाम लेता हूँ
ख़ुशी जिस ने खोजी वो धन ले के लौटा हँसी जिस ने खोजी चमन ले के लौटा मगर प्यार को खोजने जो गया वो न तन ले के लौटा न मन ले के लौटा
है प्यार से उसकी कोई पहचान नहीं जाना है किधर उसका कोई ज्ञान नहीं तुम ढूंढ रहे हो किसे इस बस्ती में इस दौर का इन्सान है इन्सान नहीं
अब के सावन में ये शरारत मेरे साथ हुई मेरा घर छोड़ के कुल शहर में बरसात हुई आप मत पूछिए क्या हम पे सफ़र में गुज़री था लुटेरों का जहाँ गाँव, वहीं रात हुई
हर सुबह शाम की शरारत है हर ख़ुशी अश्क़ की तिज़ारत है मुझसे न पूछो अर्थ तुम यूँ जीवन का ज़िन्दग़ी मौत की इबारत है
काँपती लौ, ये स्याही, ये धुआँ, ये काजल उम्र सब अपनी इन्हें गीत बनाने में कटी कौन समझे मेरी आँखों की नमी का मतलब ज़िन्दगी गीत थी पर जिल्द बंधाने में कटी
इति

Paired Painting
Rajrajeswuree Ghat, Benares
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Muktak carries.