
अंधेरे में काशी
Andhere Mein Kashi
Shriprakash Shukla
14 verses · ~29 lines · 2 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

4 verses · ~1 min
तुम इतनी देर तक घूरते रहे अंधेरे को कि तुम्हारी पुतलियों का रंग काला हो गया किताबों को ओढा इस तरह कि शरीर कागज़ हो गया
कहते रहे मौत आए तो इस तरह जैसे पानी को आती है वह बदल जाता है भाप में आती है पेड़ को वह दरवाज़ा बन जाता है जैसे आती है आग को वह राख बन जाती है
तुम गाय का थान बन जाना दूध बनकर बरसना भाप बनकर चलाना बड़े-बड़े इंजन भात पकाना जिस रास्ते को हमेशा बंद रहने का शाप मिला उस पर दरवाज़ा बनकर खुलना राख से मांजना बीमार माँ की पलंग के नीचे रखे बासन
तुम एक तीली जलाना उसे देर तक घूरना
इति

Paired Painting
Reclining Nair Lady
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Kaya carries.