№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

Canvas
Reclining Nair Lady

Shanta

काया

Kaya

Geet Chaturvedi
1 min read 4 versesकायाbodyअंधेरा

4 verses · ~1 min

तुम इतनी देर तक घूरते रहे अंधेरे को कि तुम्हारी पुतलियों का रंग काला हो गया किताबों को ओढा इस तरह कि शरीर कागज़ हो गया

कहते रहे मौत आए तो इस तरह जैसे पानी को आती है वह बदल जाता है भाप में आती है पेड़ को वह दरवाज़ा बन जाता है जैसे आती है आग को वह राख बन जाती है

तुम गाय का थान बन जाना दूध बनकर बरसना भाप बनकर चलाना बड़े-बड़े इंजन भात पकाना जिस रास्ते को हमेशा बंद रहने का शाप मिला उस पर दरवाज़ा बनकर खुलना राख से मांजना बीमार माँ की पलंग के नीचे रखे बासन

तुम एक तीली जलाना उसे देर तक घूरना

इति

Geet Chaturvedi

The Poet

गीत चतुर्वेदी

Geet Chaturvedi

Reclining Nair Lady

Paired Painting

Reclining Nair Lady

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Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Kaya carries.