№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

Canvas
Rama Breaks the Bow

Veera

पुनः नया निर्माण करो

Punah Naya Nirman Karo

Dwarika Prasad Maheshwari
2 min read 6 versesनवनिर्माणreconstructionदेशभक्ति

6 verses · ~2 min

उठो धरा के अमर सपूतो पुनः नया निर्माण करो। जन-जन के जीवन में फिर से नई स्फूर्ति, नव प्राण भरो।

नया प्रात है, नई बात है, नई किरण है, ज्योति नई। नई उमंगें, नई तरंगे, नई आस है, साँस नई। युग-युग के मुरझे सुमनों में, नई-नई मुसकान भरो।

डाल-डाल पर बैठ विहग कुछ नए स्वरों में गाते हैं। गुन-गुन-गुन-गुन करते भौंरे मस्त हुए मँडराते हैं। नवयुग की नूतन वीणा में नया राग, नवगान भरो।

कली-कली खिल रही इधर वह फूल-फूल मुस्काया है। धरती माँ की आज हो रही नई सुनहरी काया है। नूतन मंगलमय ध्वनियों से गुंजित जग-उद्यान करो।

सरस्वती का पावन मंदिर यह संपत्ति तुम्हारी है। तुम में से हर बालक इसका रक्षक और पुजारी है। शत-शत दीपक जला ज्ञान के नवयुग का आह्वान करो।

उठो धरा के अमर सपूतो, पुनः नया निर्माण करो।

इति

Dwarika Prasad Maheshwari

The Poet

द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

Dwarika Prasad Maheshwari

Rama Breaks the Bow

Paired Painting

Rama Breaks the Bow

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Punah Naya Nirman Karo carries.