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पत्थर के जिगर वालों ग़म में वो रवानी है
Patthar Ke Jigar Walon Gham Mein Wo Rawani Hai
Bashir Badr
7 verses · ~13 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

5 verses · ~1 min
बहुत दूर पर अट्टहास कर सागर हँसता है। दशन फेन के, अधर व्योम के।
ऐसे में सुन्दरी! बेचने तू क्या निकली है, अस्त-व्यस्त, झेलती हवाओं के झकोर सुकुमार वक्ष के फूलों पर?
सरकार! और कुछ नहीं, बेचती हूँ समुद्र का पानी। तेरे तन की श्यामता नील दर्पण-सी है, श्यामे! तूने शोणित में है क्या मिला लिया?
सरकार! और कुछ नहीं, रक्त में है समुद्र का पानी।
माँ! ये तो खारे आँसू हैं, ये तुझको मिले कहाँ से?
इति

Paired Painting
Shantanu and Ganga
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Samudra Ka Pani carries.