№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Jauhar

Karuna

विपटा क स्राप

Vipata Ka Srap

Buddhinath Mishra
1 min read 7 versesमैथिलीMaithiliश्राप

7 verses · ~1 min

सपटा सँ भेटल वरदान विपटा केर स्राप भ' गेलै की करतै यज्ञक संकल्प उनटा जँ जाप भ' गेलै ।

पाबनि-पाबनि बाँटल लोक बन्हकी लागल मुरेठ भेल आखर- आखर कीलित देश कठरा छूटल सिलेठ भेल

सदिखन जागल आँखिक लेल सपना संताप भ' गेलै ।

तोरि गेलै खेतक सभ आरि गाम- गाम आबिकें दहार कत' गेलै 'बहिंगा सन मोछ' कत' गेलै 'बज्जर केवार'

बौनवीर सभ लगैछ आइ राजनीति नाप भ' गेलै ।

टोल-टोल अछि मसान घाट जरइछ बारहमासा गीत नगरक फुटपाथ पर बिकाइ आँचर केर खूँट बन्हल प्रीत

हुनका ले' सभटा आदर्श रमनामी छाप भ' गेलै ।

इति

Buddhinath Mishra

The Poet

बुद्धिनाथ मिश्र

Buddhinath Mishra

Jauhar

Paired Painting

Jauhar

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Vipata Ka Srap carries.