
दिवंगत पिता के प्रति
Divangat Pita Ke Prati
Sarveshwar Dayal Saxena
12 verses · ~37 lines · 2 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

4 verses · ~1 min
रोज एक परिजन को खोया पाकर लम्बी उमर आज मैं जी भर रोया।
जिनके साथ उठा-बैठा पर्वत-शिखरों पर उनको आया सुला दहकते अंगारों पर जो था मुझे जगाता सारी रात हँसा कर वह है खुद लहरों पर सोया।
एक-एक कर तजे सभी सम्मोहन घर का रहा देखता मैं निरीह सुग्गा पिंजर का हुआ अचंभित फूल देखकर टूट गया वह धागा जिसमें हार पिरोया।
किसके-किसके नाम दीप लहरों पर भेजूँ टूटे-बिखरे शीशे कितने चित्र सहेजूँ जिसने चंदा बनने का एहसास कराया बादल बनकर वही भिगोया।
इति

Paired Painting
The Death of Jatayu
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Jee Bhar Roya carries.