№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Sita in Ashok Vatika

Karuna

गरहाँ क जीवाश्म

Garaha Ka Jivashma

Buddhinath Mishra
2 min read 10 versesमैथिलीMaithiliपीढ़ी

10 verses · ~2 min

बाबू पढ़ने छलाह अ सँ अदौड़ी आ सँ आमिल तैं न दौड़ि सकलाह ने मिल सकलाह सौराठक धवल-धार सँ।

जिनगी भरि करैत रहलाह पुरहिताइ खाइत रहलाह चूड़ा-दही बन्हैत रहलाह भोजनी आ अगों क पोटरी पूजावला अड.पोछा मे हम पढ़लहुँ अ सँ अनार आ सँ आम तहिया नहि बूझल छल जे ई वर्णमाला पढ़िते खास सँ आम भ जायब।

एहि देशक आरक्षित शब्दकोश मे फूलक सहस्रो पर्याय अछि मुदा फलक एकोटा नहि।

बून-बून सँ समुद्र बनवाक प्रक्रिया मे हम ओ भूतपूर्व बून छी जेकरा समुद्र कहयबाक अधिकार नहि छै।

आब हमर नेना पढ़ि रहल छथि ए सँ एपुल बी सँ बैग,सी सँ कैट।

आ धीरे-धीरे उतरि रहल अछि हमरा दू बीतक फ्लैट मे बाइबिलक आदम आदम क ईव आ ईवक वर्जित फल।

हमरा परदेस कें मात करत बौआ क बिदेस।

हमर लगायल आमक गाछी बाबुओ देखलनि,बौओ देखला लेकिन बौआक लगायल सेब क गाछ ओहि ईडन गार्डेन मे फरत जतय नहि हेतै आमक बास नहि हेतै अदौड़ी क विन्यास।

लिबर्टी क ईव पोति रहल अछि आस्ते-आस्ते मधुबनी क भित्तिचित्र कें देसी गुरूजी, एक्काँ-दुक्काँ,सबैया-अढ़ैया गरहाँ सभ जा रहल अछि भूगर्भ मे जीवाश्म बनवाक लेल।

(03 नवम्बर 2007)

इति

Buddhinath Mishra

The Poet

बुद्धिनाथ मिश्र

Buddhinath Mishra

Sita in Ashok Vatika

Paired Painting

Sita in Ashok Vatika

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