
एक आगमन
Ek Aagaman
Bhawani Prasad Mishra
4 verses · ~10 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

1 verses · ~1 min
सुबह हो गई है मैं कह रहा हूँ सुबह हो गई है मगर क्या हो गया है तुम्हें कि तुम सुनते नहीं हो अपनी दरिद्र लालटेनें बार-बार उकसाते हुए मुस्काते चल रहे हो मानो क्षितिज पर सूरज नहीं तुम जल रहे हो और प्रकाश लोगों को तुमसे मिल रहा है यह तो तालाब का कमल है वह तुम्हारे हाथ की क्षुद्र लालटेन से खिल रहा है बदतमीज़ी बन्द करो लालटेनें मन्द करो बल्कि बुझा दो इन्हें एकबारगी शाम तक लालटेनों में मत फँसाए रखो अपने हाथ बल्कि उनसे कुछ गढ़ो हमारे साथ-साथ हम जिन्हें सुबह होने की सुबह होने से पहले खबर लग जाती है हम जिनकी आत्मा नसीमे-सहर की आहट से रात के तीसरे पहर जग जाती है हम कहते हैं सुबह हो गई है।
इति

Paired Painting
Surya
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Subah Ho Gayi Hai carries.