№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Damayanti and Her Maidservant

Shringara

क्या हर्ज़ है

Kya Harz Hai

Bhawani Prasad Mishra
3 min read 14 versesसपनाdreamविदा

14 verses · ~3 min

क्या हर्ज़ है अगर अब विदा ले लें हम एक सपने से

जो तुमने भी देखा था और मैंने भी दोनों के सपने में

कोई भी फ़र्क नहीं था ऐसा तो नहीं कहूँगा

फ़र्क था मगर तफ़सील -भर का मूलतः

सपना एक ही था शुरू हुआ था वह एक ही समय एक ही जगह एक ही कारण से मगर उसे देखा था दो आमने – सामने खड़े व्यक्तियों ने

इसलिए एक ने ज्यादातर भाग इस तरफ़ का देखा दुसरे ने उस तरफ का एक ने देखा

जिस पर डूबते सूरज की किरणें पर रहीं थीं ऐसा एक निहायत ख़ूबसूरत चेहरा लगभग असंभव रूप से सही और सुन्दर नाक घनी भौहें पतले ओंठ घनी और बिखरी केश राशि सरो जैसा क़द और आखें मदभरी न कहो मद भरने वाली तो कह ही सकते हैं और दूसरों ने देखा

डूबते सूरज की तरफ़ पीठ थी जिसकी ऐसा एक व्याक्ति लगभग बंधा हुआ- सा अपने ही रूप की डोर से सपने लम्बे लगते हैं मगर वे सचमुच लम्बे नहीं होते हमारे लम्बे लगने वाले

सपने में बड़ी- बड़ी घटनाएँ हुईं डूबे बहे उतराये

हम सुख – दुख में और फिर जब सपना टूट गया तो हमने आदमी की तमाम जिदों की तरह इस बात की जिद की

कि सपना हम देखते रहेंगे मगर बहुत दिनों से सोच रहा हूँ मैं और अब पूछ रहा हूँ तुमसे

क्या हर्ज़ है अगर अब विदा ले लें हम उस सपने से जो हमने सच पूछो तो

थोड़ी देर एक साथ देखा और जाग जाने पर भी जिसे बरसों से

पूरी ज़िद के साथ पकड़े हैं बल्कि पकड़े रहने का बहाना किये हैं!

इति

Bhawani Prasad Mishra

The Poet

भवानीप्रसाद मिश्र

Bhawani Prasad Mishra

Damayanti and Her Maidservant

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Damayanti and Her Maidservant

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Kya Harz Hai carries.