№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Subhadra and Arjuna

Shringara

कुछ सुन लें, कुछ अपनी कह लें

Kuch Sun Len, Kuch Apni Kah Len

Bhagwati Charan Verma
2 min read 12 versesप्रेमloveजीवन

12 verses · ~2 min

कुछ सुन लें, कुछ अपनी कह लें।

जीवन-सरिता की लहर-लहर, मिटने को बनती यहाँ प्रिये संयोग क्षणिक, फिर क्या जाने हम कहाँ और तुम कहाँ प्रिये।

पल-भर तो साथ-साथ बह लें, कुछ सुन लें, कुछ अपनी कह लें।

आओ कुछ ले लें औ' दे लें।

हम हैं अजान पथ के राही, चलना जीवन का सार प्रिये पर दुःसह है, अति दुःसह है एकाकीपन का भार प्रिये।

पल-भर हम-तुम मिल हँस-खेलें, आओ कुछ ले लें औ' दे लें।

हम-तुम अपने में लय कर लें।

उल्लास और सुख की निधियाँ, बस इतना इनका मोल प्रिये करुणा की कुछ नन्हीं बूँदें कुछ मृदुल प्यार के बोल प्रिये।

सौरभ से अपना उर भर लें, हम तुम अपने में लय कर लें।

हम-तुम जी-भर खुलकर मिल लें।

जग के उपवन की यह मधु-श्री, सुषमा का सरस वसन्त प्रिये दो साँसों में बस जाय और ये साँसें बनें अनन्त प्रिये।

मुरझाना है आओ खिल लें, हम-तुम जी-भर खुलकर मिल लें।

इति

Bhagwati Charan Verma

The Poet

भगवतीचरण वर्मा

Bhagwati Charan Verma

Subhadra and Arjuna

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Subhadra and Arjuna

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Kuch Sun Len, Kuch Apni Kah Len carries.