
आज मानव का
Aaj Manav Ka
Bhagwati Charan Verma
8 verses · ~18 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Shringara
Aaj Manav Ka Sunahla Prat Hai
Bhagwati Charan Verma8 verses · ~2 min
आज मानव का सुनहला प्रात है, आज विस्मृत का मृदुल आघात है; आज अलसित और मादकता-भरे, सुखद सपनों से शिथिल यह गात है;
मानिनी हँसकर हृदय को खोल दो, आज तो तुम प्यार से कुछ बोल दो ।
आज सौरभ में भरा उच्छ्वास है, आज कम्पित-भ्रमित-सा बातास है; आज शतदल पर मुदित सा झूलता, कर रहा अठखेलियाँ हिमहास है;
लाज की सीमा प्रिये, तुम तोड दो आज मिल लो, मान करना छोड दो ।
आज मधुकर कर रहा मधुपान है, आज कलिका दे रही रसदान है; आज बौरों पर विकल बौरी हुई, कोकिला करती प्रणय का गान है;
यह हृदय की भेंट है, स्वीकार हो आज यौवन का सुमुखि, अभिसार हो ।
आज नयनों में भरा उत्साह है, आज उर में एक पुलकित चाह है; आज श्चासों में उमड़कर बह रहा, प्रेम का स्वच्छन्द मुक्त प्रवाह है;
डूब जायें देवि, हम-तुम एक हो आज मनसिज का प्रथम अभिषेक हो ।
इति

Paired Painting
Damayanti and the Swan
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Aaj Manav Ka Sunahla Prat Hai carries.