
आइये इक पहर यहीं बैठें
Aaiye Ik Pahar Yahin Baithen
Amitabh Tripathi ‘Amit’
6 verses · ~19 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Shanta
Hai Ajeeb Shahar ki Zindagi
Bashir Badr6 verses · ~1 min
है अजीब शहर कि ज़िंदगी, न सफ़र रहा न क़याम है कहीं कारोबार सी दोपहर, कहीं बदमिज़ाज सी शाम है
कहाँ अब दुआओं कि बरकतें, वो नसीहतें, वो हिदायतें ये ज़रूरतों का ख़ुलूस है, या मतलबों का सलाम है
यूँ ही रोज़ मिलने कि आरज़ू बड़ी रख रखाव कि गुफ्तगू ये शराफ़ातें नहीं बे ग़रज़ उसे आपसे कोई काम है
वो दिलों में आग लगायेगा में दिलों कि आग बुझाऊंगा उसे अपने काम से काम है मुझे अपने काम से काम है
न उदास हो न मलाल कर, किसी बात का न ख्याल कर कई साल बाद मिले है हम, तिरे नाम आज कि शाम कर
कोई नग्मा धुप के गॉँव सा, कोई नग़मा शाम कि छाँव सा ज़रा इन परिंदों से पूछना ये कलाम किस का कलाम है
इति

Paired Painting
Woman Holding a Fan
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Hai Ajeeb Shahar ki Zindagi carries.