
अभी इस तरफ़ न निगाह कर
Abhi Is Taraf Na Nigah Kar
Bashir Badr
4 verses · ~10 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Shringara
Gulabon Ki Tarah Dil Apna
Bashir Badr5 verses · ~1 min
गुलाबों की तरह दिल अपना शबनम में भिगोते हैं मोहब्बत करने वाले ख़ूबसूरत लोग होते हैं
किसी ने जिस तरह अपने सितारों को सजाया है ग़ज़ल के रेशमी धागे में यूँ मोती पिरोते हैं
पुराने मौसमों के नामे-नामी मिटते जाते हैं कहीं पानी, कहीं शबनम, कहीं आँसू भिगोते हैं
यही अंदाज़ है मेरा समन्दर फ़तह करने का मेरी काग़ज़ की कश्ती में कई जुगनू भी होते हैं
सुना है बद्र साहब महफ़िलों की जान होते थे बहुत दिन से वो पत्थर हैं, न हँसते हैं न रोते हैं
इति

Paired Painting
A Parsee Girl
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Gulabon Ki Tarah Dil Apna carries.