
औरत की ज़िन्दगी
Aurat Ki Zindagi
Raghuvir Sahay
2 verses · ~4 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

7 verses · ~1 min
दाँव लगा कपटी शकुनी से हार वरूँ मैं कब तक?
कहो, तात- विपरीत तटों का सेतु बनूँ मैं कब तक? इनका-उनका बोझा-बस्ता पीठ धरूँ मैं कब तक?
बड़े-बड़े ज़ालिम पिंडों की चोट सहूँ मैं कब तक?
पाँव फँसाए गहरे पानी खड़ा रहूँ मैं कब तक? नीली होकर उधड़ी चमड़ी धार गहूँ मैं कब तक?
कोई तो बतलाए आकर यहाँ रहूँ मैं कब तक?
रोआँ-रोआँ हाड़ कँपाती शीत सहूँ मैं कब तक? बिजली, ओलों, बारिश वाली रात सहूँ मैं कब तक?
बहुत हुआ, अब और न होगा धीर धरूँ मैं कब तक?
इति

Paired Painting
The Pandavas at the Gaming Table
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Kab Tak? carries.