
तेरा हर लफ्ज़ मेरी रूह को छूकर निकलता है
Tera Har Lafz Meri Rooh Ko Chookar Nikalta Hai
Ashok Anjum
5 verses · ~11 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

8 verses · ~1 min
वो मुझको आँख भरकर देखता है बड़ी हसरत से खंजर देखता है
तू जिसमें सिर्फ़ पत्थर देखता है वहीं पर कोई ईश्वर देखता है
न कोई देख सकता है वहाँ तक जहाँ तक एक शायर देखता है
तू जो भी कर रहा है बेखुदी में समझ ले ये कि नटवर देखता है
उसे अपनों से यों नारें मिली हैं वो सावन में भी पतझर देखता है
मैं पारस तो नहीं, सच बोलता हूँ णमाना फिर क्यों देखता है
घटायें देखकर खुश हो रहे सब मगर होरी क्यों छप्पर देखता है
अगर कुछ भी नहीं है बीच अपने वो फिर क्यों मुझको मुड़कर देखता है
इति

Paired Painting
Yoginis and Krishna
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Wo Mujhko Aankh Bharkar carries.