№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

Canvas
Woman with Fruit Plate

Shanta

रिश्ता

Rishta

Anamika
1 min read 5 versesरिश्ताहँसीबहनापा

5 verses · ~1 min

वह बिलकुल अनजान थी! मेरा उससे रिश्ता बस इतना था कि हम एक पंसारी के ग्राहक थे नए मुहल्ले में।

वह मेरे पहले से बैठी थी टॉफ़ी के मर्तबान से टिककर स्टूल के राजसिंहासन पर।

मुझसे भी ज्यादा थकी दीखती थी वह फिर भी वह हँसी! उस हँसी का न तर्क था न व्याकरण न सूत्र न अभिप्राय! वह ब्रह्म की हँसी थी।

उसने फिर हाथ भी बढ़ाया और मेरी शाल का सिरा उठाकर उसके सूत किए सीधे जो बस की किसी कील से लगकर भृकुटि की तरह सिकुड़ गए थे।

पल भर को लगा, उसके उन झुके कंधों से मेरे भन्नाए हुए सिर का बेहद पुराना है बहनापा।

इति

Anamika

The Poet

अनामिका

Anamika

Woman with Fruit Plate

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Woman with Fruit Plate

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Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Rishta carries.