
शब्द ही हैं मन्त्र
Shabd Hi Hain Mantra
Pratibha Saxena
7 verses · ~32 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

8 verses · ~2 min
गर्मी गज़ब है! चैन से जरा ऊंघ पाने की इससे ज़्यादा सुरिक्षत, ठंडी, शांत जगह धरती पर दूसरी नहीं शायद ।
गैलिस की पतलून, ढीले पैतावे पहने रोज़ आते हैं जो नियत समय पर यहां ऊंघने
वे वृद्ध गोरियो, किंग लियर, भीष्म पितामह और विदुर वगैरह अपने साग-वाग लिए-दिए आते हैं छोटे टिफ़न में।
टायलेट में जाकर मांजते हैं देर तलक अपना टिफन बाक्स खाने के बाद। बहुत देर में चुनते हैं अपने-लायक मोटे हर्फों वाली पतली किताब, उत्साह से पढ़ते है पृष्ठ दो-चार देखते हैं पढ़कर ठीक बैठा कि नहीं बैठा चश्मे का नंबर।
वे जिसके बारे में पढ़ते हैं- वो ही हो जाते हैं अक्सर- बारी-बारी से अशोक, बुद्ध, अकबर। मधुबाला, नूतन की चाल-ढाल, पृथ्वी कपूर और उनकी औलादों के तेवर ढूंढा करते हैं वे इधर-उधर और फिर थककर सो जाते हैं कुर्सी पर।
मुंह खोल सोए हुए बूढ़े दुनिया की प्राचीनतम पांडुलिपियों से झड़ी धूल फांकते-फांकते खुद ही हो जाते हैं जीर्ण-शीर्ण भूजर्पत्र!
कभी-कभी हवा छेड़ती है इन्हें, गौरैया उड़ती-फुड़ती इन पर कर जाती है नन्हें पंजों से हस्ताक्षर।
क्या कोई राहुल सांस्कृतायन आएगा और जिह्वार्ग किए इन्हें लिए जाएगा तिब्बत की सीमा के पार?
इति

Paired Painting
A Preacher Expounding the Poorans, In the Temple of Unn Poorna, Benares
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Pustakalay Mein Jhapki carries.