
कोई अर्थ नहीं
Koi Arth Nahin
Ramdhari Singh 'Dinkar'
1 verse · ~15 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Shanta
Sukh-Dukh Aana-Jaana
Amitabh Tripathi ‘Amit’8 verses · ~2 min
सुख-दुख आना-जाना साथी सुख-दुख आना-जाना।
सुख की है कल्पना पुरानी स्वर्गलोक की कथा कहानी सत्य-झूठ कुछ भी हो लेकिन है मन को भरमाना साथी सुख-दुख आना-जाना।
सुख के साधन बहुत जुटाये सुख को किन्तु खरीद न पाये थैली लेकर फिरे ढूँढते सुख किस हाट बिकाना साथी सुख-दुख आना-जाना।
आस-डोर से बँधी सवारी सुख-दुख खीचें बारी-बारी कहे कबीरा दो पाटन में सारा जगत पिसाना साथी सुख-दुख आना-जाना।
वनवासी जीवन में सुख था शशिमुख के आगे रवि मुख था किन्तु स्वर्ण-मृग की इच्छा में लंका हुआ ठिकाना साथी सुख-दुख आना-जाना।
दुखमय जगत काल की फाँसी देख कुमार हुआ सन्यासी शोध किया तो पाया तृष्णा- पीछे जग बौराना साथी सुख-दुख आना-जाना।
जब-जब किया सुखों का लेखा सुख को पता बदलते देखा किन्तु सदा ही इसके पीछे दुख पाया लिपटाना साथी सुख-दुख आना-जाना।
जीवन की अनुभूति इसी में द्वेष इसी में प्रीति इसी में इसी खाद-पानी पर पलकर जीवन कुसुम फुलाना साथी सुख-दुख आना-जाना।
इति

Paired Painting
Folio from an Ashtasahasrika Prajnaparamita Manuscript Depicting Maitreya
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Sukh-Dukh Aana-Jaana carries.