
रात होते-प्रात होते
Raat Hote-Prat Hote
Sachchidananda Hirananda Vatsyayan 'Agyeya'
1 verse · ~14 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Shringara
Raat Dekho Ja Rahi Hai
Amitabh Tripathi ‘Amit’5 verses · ~2 min
भय कहीं विश्राम लेने जा रहा है भोर का तारा नज़र बस आ रहा है और अब पहली किरन मुस्का रही है रात देखो जा रही है।
फड़फड़ाये पंख पीपल के कि पत्ते पक्षियों के झुण्ड वापस जा रहे हैं नगर के उपरक्षियों के ठण्ड से सिकुड़ी हवा मानो पुनः गति पा रही है। रात देखो जा रही है।
मौन था अभिसार फिर भी मुखर है अभिव्यक्ति उसकी जागरण के चिह्न आँखों में लटें हैं मुक्त जिसकी भींचती रसबिम्ब आँगन पार करती आ रही है। रात देखो जा रही है।
यंत्र-चालित से उठे हैं हाथ यह क्या? पार्श्व खाली कहा दर्पण ने मिटा लो वक्त्र से सिन्दूर, लाली रात्रि के मधुपान की स्मृति हृदय सहला रही है। रात देखो जा रही है।
फिर उड़ेला चिमनियों ने ज़हर सा वातावरण में हुआ कोलाहल चतुर्दिक उठो, भागो चलो रण में स्वप्न-समिधा , जीविका की वेदिका सुलगा रही है। रात देखो जा रही है।
इति

Paired Painting
Lady With Comb
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Raat Dekho Ja Rahi Hai carries.