№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

Canvas
Coastal Landscape with Palms, Ceylon

Shanta

जग तू मुझे अकेला कर दे

Jag Tu Mujhe Akela Kar De

Amitabh Tripathi ‘Amit’
1 min read 4 versesअकेलाaloneसंसार

4 verses · ~1 min

जग तू मुझे अकेला कर दे।

इच्छा और अपेक्षाओं में स्वार्थ परार्थ कामनाओं में श्लिष्ट हुआ मन अकुलाता ज्यों नौका वर्तुल धाराओं में सूना कर दे मानस का तट अब समाप्त यह मेला कर दे जग तू मुझे अकेला कर दे।

सम्बन्धों के मोहजाल में गुँथा हुआ अस्तित्व हमारा चक्रवात में तृण सा घूर्णित खोज रहा है विरल किनारा मन-मस्तक के संघर्षों का दूर अनिष्ट झमेला कर दे जग तू मुझे अकेला कर दे।

व्यक्ति कहाँ मिलते हैं मिलतीं, रूपाकार हुई तृष्णायें टकराते विपरीत अभीप्सित पैदा होती हैं उल्कायें तम की यह क्रीड़ा विनष्ट हो उस प्रभात की वेला कर दे जग तू मुझे अकेला कर दे।

इति

Amitabh Tripathi ‘Amit’

The Poet

अमिताभ त्रिपाठी 'अमित'

Amitabh Tripathi ‘Amit’

Coastal Landscape with Palms, Ceylon

Paired Painting

Coastal Landscape with Palms, Ceylon

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