
कवि कुछ रचो नवीन
Kavi Kuch Racho Naveen
Amitabh Tripathi ‘Amit’
9 verses · ~19 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

1 verses · ~1 min
भोर जल्द भाग गई लू के डर से साँझ भी निकली है बहुत देर में घर से पछुँआ के झोकों से बरसती अगिन गर्मी के दिन। पशु-पक्षी पेड़-पुष्प सब हैं बेहाल सूरज ने बना दिया सबको कंकाल माँ चिड़िया लाती पर दाने बिन-बिन गर्मी के दिन। हैण्डपम्प पर कौव्वा ठोंक रहा टोंट कुत्ता भी नमी देख गया वहीं लोट दुपहरिया बीत रही करके छिन-छिन गर्मी के दिन। बच्चों की छुट्टी है नानी घर तंग ऊधम दिन भर, चलती आपस की जंग दिन में दो पल सोना हो गया कठिन गर्मी के दिन। शादी बारातों का न्योता है रोज कहीं बहूभोज हुआ कहीं प्रीतिभोज पेट-जेब दोनों के आये दुर्दिन गर्मी के दिन। गर्मी के दिन।
इति

Paired Painting
Hyderabad, India street scene
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Garmi Ke Din carries.