№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

Canvas
The Village Entrance

Shanta

बहुत गुमनामों में शामिल एक नाम अपना भी है

Bahut Gumnamon Mein Shamil Ek Naam Apna Bhi Hai

Amitabh Tripathi ‘Amit’
1 min read 7 versesगुमनामidentityग़ज़ल

7 verses · ~1 min

बहुत गुमनामों में शामिल एक नाम अपना भी है इल्मे-नाकामी[1] में हासिल इक मक़ाम[2] अपना भी है

गौर करने के लिये भी कुछ न कुछ मिल जायेगा हाले-दिल पर हक़ के बातिल[3] इक कलाम[4] अपना भी है

मेहरबाँ[5] भी हैं बहुत और कद्रदाँ[6] भी हैं बहुत हो कभी ज़र्रानवाज़ी[7] इन्तेजाम अपना भी है

कब हुज़ूरे-वक़्त को फ़ुरसत मिलेगी देखिये मुश्त-ए-दरबान[8] तक पहुँचा सलाम अपना भी है

चलिये मैं भी साथ चलता हूँ सफ़र कट जायेगा आप की तक़रीर[9] के पहले पयाम[10] अपना भी है

इक परिन्दे की तरह बस आबो-दाने[11] की तलाश जिन्दगी का यह तरीका सुबहो-शाम अपना भी है

घर की चौखट तक मेरा ही हुक़्म चलता है ’अमित’ मिल्कीयत[12] छोटी सही लेकिन निज़ाम[13] अपना भी है

इति

Amitabh Tripathi ‘Amit’

The Poet

अमिताभ त्रिपाठी 'अमित'

Amitabh Tripathi ‘Amit’

The Village Entrance

Paired Painting

The Village Entrance

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