№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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The Nati Folk Dance of Himachal

Hasya

बिन-बूझ पहेली (बहिर्लापिका)

Bin-Boojh Paheli (Bahirlapika)

Amir Khusrow
2 min read 13 versesपहेलीriddleमनोरंजन

13 verses · ~2 min

एक नार कुँए में रहे, वाका नीर खेत में बहे। जो कोई वाके नीर को चाखे, फिर जीवन की आस न राखे।।

उत्तर – तलवार

एक जानवर रंग रंगीला, बिना मारे वह रोवे। उस के सिर पर तीन तिलाके, बिन बताए सोवे।।

उत्तर - मोर।

चाम मांस वाके नहीं नेक, हाड़ मास में वाके छेद। मोहि अचंभो आवत ऐसे, वामे जीव बसत है कैसे।।

उत्तर - पिंजड़ा।

स्याम बरन की है एक नारी, माथे ऊपर लागै प्यारी। जो मानुस इस अरथ को खोले, कुत्ते की वह बोली बोले।।

उत्तर - भौं (भौंए आँख के ऊपर होती हैं।)

एक गुनी ने यह गुन कीना, हरियल पिंजरे में दे दीना। देखा जादूगर का हाल, डाले हरा निकाले लाल।

उत्तर - पान।

एक थाल मोतियों से भरा, सबके सर पर औंधा धरा। चारों ओर वह थाली फिरे, मोती उससे एक न गिरे।

उत्तर – आसमान

बिन बूझ पहेली या बहिर्लापिका, इसका उत्तर पहेली से बाहर होता है।

इति

Amir Khusrow

The Poet

अमीर खुसरो

Amir Khusrow

The Nati Folk Dance of Himachal

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The Nati Folk Dance of Himachal

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Bin-Boojh Paheli (Bahirlapika) carries.