
बूझ पहेली (अंतर्लापिका)
Boojh Paheli (Antarlapika)
Amir Khusrow
15 verses · ~21 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Hasya
Bin-Boojh Paheli (Bahirlapika)
Amir Khusrow13 verses · ~2 min
एक नार कुँए में रहे, वाका नीर खेत में बहे। जो कोई वाके नीर को चाखे, फिर जीवन की आस न राखे।।
उत्तर – तलवार
एक जानवर रंग रंगीला, बिना मारे वह रोवे। उस के सिर पर तीन तिलाके, बिन बताए सोवे।।
उत्तर - मोर।
चाम मांस वाके नहीं नेक, हाड़ मास में वाके छेद। मोहि अचंभो आवत ऐसे, वामे जीव बसत है कैसे।।
उत्तर - पिंजड़ा।
स्याम बरन की है एक नारी, माथे ऊपर लागै प्यारी। जो मानुस इस अरथ को खोले, कुत्ते की वह बोली बोले।।
उत्तर - भौं (भौंए आँख के ऊपर होती हैं।)
एक गुनी ने यह गुन कीना, हरियल पिंजरे में दे दीना। देखा जादूगर का हाल, डाले हरा निकाले लाल।
उत्तर - पान।
एक थाल मोतियों से भरा, सबके सर पर औंधा धरा। चारों ओर वह थाली फिरे, मोती उससे एक न गिरे।
उत्तर – आसमान
बिन बूझ पहेली या बहिर्लापिका, इसका उत्तर पहेली से बाहर होता है।
इति

Paired Painting
The Nati Folk Dance of Himachal
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Bin-Boojh Paheli (Bahirlapika) carries.