
ये पंक्तियाँ मेरे निकट
Ye Panktiyan Mere Nikat
Kunwar Narayan
3 verses · ~14 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

4 verses · ~1 min
कहता है पका हुआ फल देह नहीं है मेरी सीमा मुझसे है आगामी कल ।
चुभो रहे हैं जैसे पिन वृन्त पर टिके मेरे दिन जाने कब कौन सी हवा ले जाए मेरे पल छिन स्वागत में आया मेरे समय लिए त्यौरी पर बल ।
हठयोगी तरु का मैं व्रत पूर्णकाम है यह तन श्लथ साथ-साथ चलते हैं अब ऋतुओं के जितने तीरथ रस अब तो पंचामृत है भाव हो गए तुलसी दल ।
अन्तहीन ख़ुशबू का छोर मंजरियों पर उगती भोर धुँधली आँखों देखा है रंग चढ़ी रेशे की डोर फिर होगी धरती सुफला साँचे में धूप रही ढल ।
इति

Paired Painting
Woman Holding a Fruit
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Kahta Hai Paka Hua Phal carries.