№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Bombay Singer

Shanta

मुक्तक

Muktak

Chandrasen Virat
3 min read 12 versesमुक्तकMuktakaजीवन

12 verses · ~3 min

कौन कहता है भली होती है? हर बुराई में ढली होती है एक जीवन को नरक से जोड़े वारुणी ही वो गली होती है ।

मिलते जुलते हैं, आते जाते हैं ऊपरी दोस्ती निभाते हैं हाथ तो खूब मिलाते हैं मगर दिल से दिल नहीं मिलाते हैं ।

नाश को एक कहर काफ़ी है नाव को एक लहर काफ़ी है प्राण हरने के लिए प्याले में एक ही बूँद ज़हर काफ़ी है ।

कौन कहता है कि आसान रहा मैं परेशान, हलाकान रहा युद्ध अपना तो यहाँ जीवन से ख़ूब घनघोर घमासान रहा ।

हम विधाता थे, विधायक रहे श्रेष्ठ थे, अब किसी लायक न रहे आज भी हैं तो मगर नाटक में हम विदूषक ही हैं, नायक न रहे ।

भूमि पैरों से सरक जाएगी बूँद आँसू की ढरक जाएगी मन का विश्वास अगर डोल गया दिल की दीवार दरक जाएगी ।

रूप रेशम-सा था, ऊनी निकला ज़र्फ रखता था, जुनूनी निकला सत्य अपराध कथा है जिसमें जो था नायक वही ख़ूनी निकला ।

जब भी होगा वो अचानक होगा अपने वैचित्र्य का मानक होगा जिसका आरंभ भयावह त्रासद अंत भी उसका भयानक होगा ।

देह में प्राण की महत्ता है सृष्टि में स्थान की महत्ता है अंक वे ही हैं एक से नौ तक शून्य के मान की महत्ता है ।

वह स्वयं में बुरी नहीं होती दिव्यता आसुरी नहीं होती होगा वादक ही बेसुरा कोई बाँसुरी बेसुरी नहीं होती ।

दृष्टि की, ध्यान की ज़रूरत है खोज, संधान की ज़रूरत है एक से बढ़ के एक है प्रतिभा सिर्फ़ पहचान की ज़रूरत है ।

मन से जीते जी न आशा जाए सावधानी से तलाशा जाए खूब चमकेंगे ये अनगढ़ हीरे इनको थोड़ा-सा तराशा जाए ।

इति

Chandrasen Virat

The Poet

चंद्रसेन विराट

Chandrasen Virat

Bombay Singer

Paired Painting

Bombay Singer

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Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Muktak carries.