№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

Canvas
Coastal Landscape with Palms, Ceylon

Shanta

संध्या

Sandhya

Ayodhya Singh Upadhyay 'Hariaudh'
1 min read 7 versesसंध्याeveningप्रकृति

7 verses · ~1 min

दिवस का अवसान समीप था गगन था कुछ लोहित हो चला तरू–शिखा पर थी अब राजती कमलिनी–कुल–वल्लभ की प्रभा

विपिन बीच विहंगम–वृंद का कल–निनाद विवधिर्त था हुआ ध्वनिमयी–विविधा–विहगावली उड़ रही नभ मण्डल मध्य थी

अधिक और हुयी नभ लालिमा दश दिशा अनुरंजित हो गयी सकल पादप–पुंज हरीतिमा अरूणिमा विनिमज्‍जि‍त सी हुयी

झलकने पुलिनो पर भी लगी गगन के तल की वह लालिमा सरित और सर के जल में पड़ी अरूणता अति ही रमणीय थी।।

अचल के शिखरों पर जा चढ़ी किरण पादप शीश विहारिणी तरणि बिंब तिरोहित हो चला गगन मंडल मध्य शनै: शनै:।।

ध्वनिमयी करके गिरि कंदरा कलित कानन केलि निकुंज को मुरलि एक बजी इस काल ही तरणिजा तट राजित कुंज में।।

(यह अंश ‘प्रिय प्रवास’ से लिया गया है)

इति

Ayodhya Singh Upadhyay 'Hariaudh'

The Poet

अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

Ayodhya Singh Upadhyay 'Hariaudh'

Coastal Landscape with Palms, Ceylon

Paired Painting

Coastal Landscape with Palms, Ceylon

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