№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Birth of Shakuntala

Karuna

मनोव्यथा - 1

Manovyatha - 1

Ayodhya Singh Upadhyay 'Hariaudh'
2 min read 10 versesमनोव्यथाmental agonyशोक

10 verses · ~2 min

कुम्हला गया हमारा फूल।

अति सुन्दर युग नयन-बिमोहन जीवन सुख का मूल। विकसित बदन परम कोमल तन रंजित चित अनुकूल। अहह सका मन मधुप न उसकी अति अनुपम छबि भूल।1।

बंद हुई ऑंखों को खोलो।

अभी बोलते थे तुम प्यारे बोलो बोलो कुछ तो बोलो। देखो भाग न मेरा सोवे चाहे मीठी नींदों सो लो। एक तुम्हीं हो जड़ी सजीवन हाथ न तुम जीवन से धो लो।2।

खोजें तुम्हें कहाँ हम प्यारे।

ए मेरे जीवन-अवलम्बन ए मेरे नयनों के तारे। नहीं देखते क्यों दुख मेरा मुझ दुखिया के एक सहारे। ललक रहे हैं लोचन पल पल मुख दिखला जा लाल हमारे।3।

इतने बने लाल क्यों रूखे।

तुम सा रुचिर रत्न खो करके आज हुए हम खूखे। कैसे बिकल बनें न बिलोचन छबि अवलोकन भूखे। मृतक न क्यों मन-मीन बनेगा प्रेम-सरोवर सूखे।4।

प्यारे कैसे मुँह दिखलाएँ।

लेती रही बलैया सब दिन ले नहिं सकीं बलाएँ। जिस पर भूली रही भूल है उसे भूल जो पाएँ। अधिक है जीवन धन बिन जग में जो जीवित रह जाए।5।

इति

Ayodhya Singh Upadhyay 'Hariaudh'

The Poet

अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

Ayodhya Singh Upadhyay 'Hariaudh'

Birth of Shakuntala

Paired Painting

Birth of Shakuntala

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Manovyatha - 1 carries.