
अति सूख सुरत किये
Ati Sukh Surat Kiye
Surdas
1 verse · ~8 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

1 verses · ~1 min
रैन जागी पिया संग रंग मीनी ॥ध्रु०॥ प्रफुल्लित मुख कंज नेन खजरीटमान मेन मिथुरी । रहे चुरन कच बदन ओप किनी ॥१॥ आतुर आलस जंभात पूलकीत अतिपान खाद मद । माते तन मुधीन रही सीथल भई बेनी ॥२॥ मांगते टरी मुक्तता हल अलक संग अरुची रही ऊरग । नसत फनी मानो कुंचकी तजी दिनी ॥३॥ बिकसत ज्यौं चंपकली भोर भये भवन चली लटपटात । प्रेम घटी गजगती गती लिन्हा ॥४॥ आरतीको करत नाश गिरिधर सुठी सुखकी रासी सूरदास । स्वामीनी गुन गने न जात चिन्ही ॥५॥
इति

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Arjuna Abducts Subhadra
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Rain Jagi Piya Sang carries.