№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Vishnu Puja

Shanta

आराधना

Aaradhana

Subhadra Kumari Chauhan
1 min read 7 versesपूजाworshipशिव

7 verses · ~1 min

जब मैं आँगन में पहुँची, पूजा का थाल सजाए। शिवजी की तरह दिखे वे, बैठे थे ध्यान लगाए॥

जिन चरणों के पूजन को यह हृदय विकल हो जाता। मैं समझ न पाई, वह भी है किसका ध्यान लगाता?

मैं सन्मुख ही जा बैठी, कुछ चिंतित सी घबराई। यह किसके आराधक हैं, मन में व्याकुलता छाई॥

मैं इन्हें पूजती निशि-दिन, ये किसका ध्यान लगाते? हे विधि! कैसी छलना है, हैं कैसे दृश्य दिखाते??

टूटी समाधि इतने ही में, नेत्र उन्होंने खोले। लख मुझे सामने हँस कर मीठे स्वर में वे बोले॥

फल गई साधना मेरी, तुम आईं आज यहाँ पर। उनकी मंजुल-छाया में भ्रम रहता भला कहाँ पर॥

अपनी भूलों पर मन यह जाने कितना पछताया। संकोच सहित चरणों पर, जो कुछ था वही चढ़ाया॥

इति

Subhadra Kumari Chauhan

The Poet

सुभद्राकुमारी चौहान

Subhadra Kumari Chauhan

Vishnu Puja

Paired Painting

Vishnu Puja

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Aaradhana carries.