
आज प्रथम गाई पिक पंचम
Aaj Pratham Gai Pik Pancham
Suryakant Tripathi 'Nirala'
4 verses · ~9 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

6 verses · ~2 min
अंबर में चंदा का प्यार बहा जा रहा। तारों के गहनों में, नाच रही चांदनी। झींगुर की रुनझुन में, पायलें बजा रही। बोल रही डालों पर 'पी-पी’ पपीहरी, बिरही उरों में आज पीड़ा जा रही।
डोल रहे धरती पर चलदल के पीते, पात, भीनी सुगंध लिये मंद पवन आ रहा। अंबर में...
अलसाई पुरवैया आज बही जा रही। पिघली सी चांदी की धार बही जा रही। धरती की छाती पर फूल झरे जा रहे- पातों के आनन पर आंसु ढले जा रहे।
खोज रहा जुगनू है-मनमाना देवता- भूला सा, मन का सितार बजा जा रहा। अंबार में...
झूम रही उपवन में चंपा की डालियां। खेतों में झूम रहीं-बाजरे की बालियां। झांक रहे झुरमुट से-पंछी अलसाये से- मार रहे डालों पर तीतर फुदकारियां।
खेल रहा मारुत भी-लतिका की गोद में- लहरों में धुंधला सा चांद छिपा जा रहा। अंबर में...
इति

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The Gopis Search for Krishna
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