
कबहुंक हौं यहि रहनि रहौंगो
Kabahunk Haun Yahi Rahani Rahaungo
Tulsidas
1 verse · ~9 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

5 verses · ~1 min
आरती श्री रामायण जी की । कीरति कलित ललित सिय पी की ॥
गावत ब्रहमादिक मुनि नारद । बाल्मीकि बिग्यान बिसारद ॥ शुक सनकादिक शेष अरु शारद । बरनि पवनसुत कीरति नीकी ॥1॥ आरती श्री रामायण जी की........॥
गावत बेद पुरान अष्टदस । छओं शास्त्र सब ग्रंथन को रस ॥ मुनि जन धन संतान को सरबस । सार अंश सम्मत सब ही की ॥2॥ आरती श्री रामायण जी की........॥
गावत संतत शंभु भवानी । अरु घटसंभव मुनि बिग्यानी ॥ ब्यास आदि कबिबर्ज बखानी । कागभुशुंडि गरुड़ के ही की ॥3॥ आरती श्री रामायण जी की........॥
कलिमल हरनि बिषय रस फीकी । सुभग सिंगार भगति जुबती की ॥ दलनि रोग भव मूरि अमी की । तात मातु सब बिधि तुलसी की ॥4॥ आरती श्री रामायण जी की........॥
इति

Paired Painting
A Preacher Expounding the Poorans, In the Temple of Unn Poorna, Benares
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Shri Ramayan Ji Ki Aarti carries.