
टूटा हृदय
Tuta Hriday
Trilochan
1 verse · ~4 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

2 verses · ~1 min
हाथों के दिन आयेंगे, कब आयेंगे, यह तो कोई नहीं बताता, करने वाले जहाँ कहीं भी देखा अब तक डरने वाले मिलते हैं। सुख की रोटी कब खायेंगे, सुख से कब सोयेंगे, उस को कब पायेंगे, जिसको पाने की इच्छा है, हरने वाले, हर हर कर अपना-अपना घर भरने वाले, कहाँ नहीं हैं। हाथ कहाँ से क्या लायेंगे।
हाथ कहाँ हैं,वंचक हाथों के चक्के में बंधक हैं,बँधुए कहलाते हैं, धरती है निर्मम,पेट पले कैसे इस उस मुखड़े की सुननी पड़ जाती है, धौंसौं के धक्के में कौन जिए।जिन साँसों में आया करती है भाषा,किस को चिन्ता है उसके दुखड़ों की।
इति

Paired Painting
Brahmin Women Collecting Water
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Hathon Ke Din carries.