№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

Canvas
Vasant Ragini, Page from a Ragamala Series

Shringara

व्रज में हरि होरी मचाई

Vraj Mein Hari Hori Machai

Surdas
3 min read 1 versesहोलीholiराधा-कृष्ण

1 verses · ~3 min

व्रज में हरि होरी मचाई । इततें आई सुघर राधिका उततें कुंवर कन्हाई । खेलत फाग परसपर हिलमिल शोभा बरनी न जाई ॥१॥ नंद घर बजत बधाई….ब्रज में हरि होरी मचाई । बाजत ताल मृदंग बांसुरी वीणा ढफ शहनाई । उडत अबीर गुलाल कुंकुमा रह्यो सकल ब्रज छाई ॥२॥ मानो मघवा झर लाई…..ब्रज में हरि होरी मचाई । लेले रंग कनक पिचकाई सनमुख सबे चलाई । छिरकत रंग अंग सब भीजे झुक झुक चाचर गाई ॥३॥ परस्पर लोग लुगाई…ब्रज में हरि होरी मचाई । राधा ने सेन दई सखियन को झुंड झुंड घिर आई । लपट झपट गई श्यामसुंदर सों बरबस पकर ले आई ॥४॥ लालजु को नाच नचाई…ब्रज में हरि होरी मचाई । छीन लई हैं मुरली पीतांबर सिरतें चुनर उढाई । बेंदी भाल नयन बिच काजर नकबेसर पहराई ॥५॥ मानो नई नार बनाई …..ब्रज में हरि होरी मचाई । मुस्कत है मुख मोड मोड कर कहां गई चतुराई । कहां गये तेरे तात नंद जी कहां जसोदा माई ॥६॥ तुम्ह अब ले ना छुडाई….ब्रज में हरि होरी मचाई । फगुवा दिये बिन जान न पावो कोटिक करो उपाई । लेहूं कढ कसर सब दिन की तुम चित चोर सबाई ॥७॥ बहुत दधि माखन खाई….ब्रज में हरि होरी मचाई । रास विलास करत वृंदावन जहां तहां यदुराई । राधा श्याम की जुगल जोरि पर सूरदास बलि जाई ॥८॥ प्रीत उर रहि न समाई….ब्रज में हरि होरी मचाई ।

इति

Surdas

The Poet

सूरदास

Surdas

Vasant Ragini, Page from a Ragamala Series

Paired Painting

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Vraj Mein Hari Hori Machai carries.