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The Disrobing of Draupadi

ShantaAdvanced

अब मैं नाच्यौ बहुत गुपाल

Ab Main Nachyau Bahut Gupal

Surdas
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अब मैं नाच्यौ बहुत गुपाल। काम-क्रोध कौ पहिरि चोलना, कंठ बिषय की माल॥ महामोह के नूपुर बाजत, निंदा सबद रसाल। भ्रम-भोयौ मन भयौ, पखावज, चलत असंगत चाल॥ तृष्ना नाद करति घट भीतर, नाना विधि दै ताल। माया कौ कटि फेंटा बाँध्यौ, लोभ-तिलक दियौ भाल॥ कोटिक कला काछि दिखराई जल-थल सुधि नहिं काल। सूरदास की सबै अबिद्या दूरि करौ नँदलाल॥

इति

Surdas

The Poet

सूरदास

Surdas

The Disrobing of Draupadi

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The Disrobing of Draupadi

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