
मेटि सकै नहिं कोइ
Meti Sakai Nahin Koi
Surdas
1 verse · ~6 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

1 verses · ~1 min
आनि सँजोग परै भावी काहू सौं न टरै। कहँ वह राहु, कहाँ वे रबि-ससि, आनि सँजोग परै॥ मुनि वसिष्ट पंडित अति ज्ञानी, रचि-पचि लगन धरै। तात-मरन, सिय हरन, राम बन बपु धरि बिपति भरै॥ रावन जीति कोटि तैंतीसा, त्रिभुवन-राज करै। मृत्युहि बाँधि कूप मैं राखै, भावी बस सो मरै॥ अरजुन के हरि हुते सारथी, सोऊ बन निकरै। द्रुपद-सुता कौ राजसभा, दुस्सासन चीर हरै॥ हरीचंद-सौ को जग दाता, सो घर नीच भरै। जो गृह छाँडि़ देस बहु धावै, तऊ वह संग फिरै॥ भावी कैं बस तीन लोक हैं, सुर नर देह धरै। सूरदास प्रभु रची सु हैहै, को करि सोच मरै॥
इति

Paired Painting
Harischandra in Distress
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Aani Sanjog Parai carries.