№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Shakuntala and her friends

Shanta

गुलदावदी

Guladavadi

Sumitranandan Pant
1 min read 4 versesफूलflowerगुलदाउदी

4 verses · ~1 min

शय्या ग्रस्त रहा मैं दो दिन, फूलदान में हँसमुख चंद्र मल्लिका के फूलों को रहा देखता सन्मुख। गुलदावदी कहूँ,—कोमलता की सीमा ये कोमल! शैशव स्मिति इनमें जीवन की भरी स्वच्छ, सद्योज्वल!

पुंज पुंज उल्लास, लीन लावण्य राशि में अपने, मृदु पंखड़ियों के पलकों पर देख रहा हो सपने! उज्वल सूरज का प्रकाश, ज्योत्स्ना भी उज्वल, शीतल, उज्वल सौरभ-अनिल, और उज्वल निर्मल सरसी जल; इन फूलों की उज्वलता छू लेती अंतर के स्तर, मधुर अवयवों में बँध वह ज्यों हो आगई निकटतर! मृदुल दलों के अंगजाल से फूट त्वचा-कोमल सुख सहृदय मानवीय स्पर्शों से हर लेता मन का दुख!

तृण तृण में औ’ निखिल प्रकृति में जीवन की है क्षमता, पर मानव का हृदय लुभाती मानव करुणा ममता!

रचनाकाल: दिसंबर’ ३९

इति

Sumitranandan Pant

The Poet

सुमित्रानंदन पंत

Sumitranandan Pant

Shakuntala and her friends

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Shakuntala and her friends

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Guladavadi carries.