№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Damayanti choosing her husband in her Svayamvara

Shringara

तुम अगर मुझको न चाहो तो कोई बात नहीं

Tum Agar Mujhko Na Chaho To Koi Baat Nahi

Sahir Ludhianvi
2 min read 4 versesजुदाईseparationग़ैर

4 verses · ~2 min

तुम अगर मुझको न चाहो तो कोई बात नहीं तुम किसी और को चाहोगी तो मुश्किल होगी

अब अगर मेल नहीं है तो जुदाई भी नहीं बात तोड़ी भी नहीं तुमने निभाई भी नहीं ये सहारा भी बहुत है मेरे जीने के लिये तुम अगर मेरी नहीं हो तो पराई भी नहीं मेरे दिल को न सराहो तो कोई बात नहीं गैर के दिल को सराहोगी, तो मुश्किल होगी

तुम हसीं हो, तुम्हें सब प्यार ही करते होंगे मैं तो मरता हूँ तो क्या और भी मरते होंगे सब की आँखों में इसी शौक़ का तूफ़ां होगा सब के सीने में यही दर्द उभरते होंगे मेरे ग़म में न कराहो तो कोई बात नहीं और के ग़म में कराहोगी तो मुश्किल होगी.

फूल की तरह हँसो, सब की निगाहों में रहो अपनी मासूम जवानी की पनाहों में रहो मुझको वो दिन न दिखाना तुम्हें अपनी ही क़सम मैं तरसता रहूँ तुम गैर की बाहों में रहो तुम अगर मुझसे न निभाओ तो कोई बात नहीं किसी दुश्मन से निभाओगी तो मुश्किल होगी

इति

Sahir Ludhianvi

The Poet

साहिर लुधियानवी

Sahir Ludhianvi

Damayanti choosing her husband in her Svayamvara

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Damayanti choosing her husband in her Svayamvara

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Tum Agar Mujhko Na Chaho To Koi Baat Nahi carries.