
कन्यादान
Kanyadaan
Rituraj
4 verses · ~12 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

4 verses · ~1 min
कितना प्रामाणिक था उसका दुःख लड़की को दान में देते वक्त जैसे वही उसकी अंतिम पूँजी हो
लड़की अभी सयानी नहीं थी अभी इतनी भोली सरल थी कि उसे सुख का आभास होता था लेकिन दुःख बाँचना नहीं आता था पाठिका थी वह धुँधले प्रकाश की कुछ तुकों और लयबद्ध पंक्तियों की
माँ ने कहा पानी में झाँककर अपने चेहरे में मत रीझना आग रोटियाँ सेंकने के लिए है जलने के लिए नहीं वस्त्र और आभूषण शब्दिक भ्रमों की तरह बंधन हैं स्त्री-जीवन के
माँ ने कहा लड़की होना पर लड़की जैसी मत दिखाई देना।
इति

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Decking the Bride
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Maa Ka Dukh carries.