
दे दिया जाता हूँ
De Diya Jaata Hoon
Raghuvir Sahay
6 verses · ~52 lines · 3 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
Loading the archive
MM · XXVI

12 verses · ~3 min
मैं नशे में धुत था आधी रात के सुनसान में एक कविता बोलता जाता था अपनी जान में
कुछ मिनट पहले किए थे बिल पे मैंने दस्तख़त ख़ानसामा सोचता होगा कि यह सब है मुफ़्त
तुम जो चाहो खा लो पी लो और यह सिगरेट लो सुन के मुझको देखता था वह कि अपने पेट को?
फिर कहा रख कर के सिगरेट जेब में मेरे लिए आज पी लूँगा इसे पर कल तो बीड़ी चाहिए
एक बंडल साठ पैसे का बहुत चल जाएगा उसकी ठंडी नज़र कहती थी कि कल, कल आएगा
होश खो बैठे हो तुम कल की ख़बर तुमको नहीं तुम जहाँ हो दर असल उस जगह पर तुम हो नहीं
कितने बच्चे हैं? कहाँ के हो? यहाँ घर है कहाँ? चार हैं, बिजनौर का हूँ, घर है मस्जिद में मियाँ
कोरमा जो लिख दिया मैंने तुम्हारे वास्ते ख़ुद वो खा लोगे कि ले जाओगे घर के वास्ते?
सुन के वो चुप हो गया और मुझको ये अच्छा लगा लड़खड़ा कर मैं उठा और भाव यह मन में जगा
एक चटोरे को नहीं उस पर तरस खाने का हक़ उफ़ नशा कितना बड़ा सिखला गया मुझको सबक़
घर पे जाकर लिख के रख लूँगा जो मुझमें हो गया सोच कर मैं घर तो पहुँचा पर पहुँचकर सो गया
उठ के वह कविता न आई अक़्ल पर आई ज़रूर उसको कितना होश था और मुझको कितना था सरूर
इति

Paired Painting
The Saki
Open the viewer →
If this held you
Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Nashe Mein Daya carries.