
ओ नटवर
O Natwar
Pratibha Saxena
5 verses · ~18 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

6 verses · ~2 min
संकर को पोटि के पियाय दियो घोर विष असुरन को छल से छकाय दई वारुणी मिलि-बाँटि देवन सों आप सुधा पान कियो मणि सै लीन्हीं अरु लक्ष्मि मन-भावनी
तेरो ही प्रताप सारे खारे समुन्दर भे तेरी इहै बान तू सबै का नचावत है आप छीर -सागर में आँख मूँद सोय जात लच्छिमी से आपुने चरन पलुटावत है
नारद सो भक्त ताकेी छाती पे मूँग दरी सभा माँझ बानर को रूप दे पठाय के उचक-उचक रह्यो मोहिनी बरैगी मोंहिं बापुरो खिस्यायो तोसों सबै विधि हार के
अब सो बिगार मेरो कर्यो ना हे रमापति, तोरी सारी पोल नाहिं खोलिहौं बखान के ढरे रहो मो पे नहीं चुप्पै रहौंगी नहिं खरी-खरी बात बरनौंगी जानि-जानि कै
कोऊ उपाओ मेरे काज सुलटाय देओ स्वारथ न मेरो, सामर्थ तेरो ही दियौ ऐसो न होय तो से वीनती है मोर, कहूँ धरो रह जाय मेरो सारो करो-धरो!
तोरा विसवास तो अब तब ही करौंगी जब देख लिहौं के तू मेरे संग ठाड़ो आय के, चोर रे कन्हैया,चाल खेलत जनम बीत्यो, करौंगी सिकायत उहाँ जसुमति से जाय के!
इति

Paired Painting
The Killing of Kansa by Lord Krishna
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Dhare Raho Mo Pe carries.