№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

Canvas
Romantic Landscape

Adbhuta

बाल-गीत

Bal-Geet

Pratibha Saxena
1 min read 4 versesबालगीतchildren's poetryप्रकृति

4 verses · ~1 min

इस पर्वत के पार एक नीलमवाली घाटी है, परियां आती रोज जहां पर संध्या और सकारे!

आज चलो इस कोलाहल से दूर प्रकृति से मिलने वन फूलों के साथ खेलने और खुशी से खिलने स्वच्छ वायु, निर्मल जलधारा .हरे-भरे फूले वन, कलरव कर ते रंगरंग के पक्षी रूप सँवारे!

पशु-पक्षी ये जीव हमारी दुनिया के सहभागी, जो अधिकार हमें धरती पर वैसा ही उनका भी बुद्धि मिली है सबके लिये विचार करें अपना सा एक शर्त बस -जो भी आये मन में आदर धारे

परियाँ वहीं खेलने आतीं जहाँ प्यार बिखरा हो, जड़-चेतन के लिये मधुर सद्भाव जहाँ निखरा हो धरती की सुन्दर रचना सम-भाव सभी को धारे और शपथ लो यही कि इसमें माँ का रूप निहारें!

इति

Pratibha Saxena

The Poet

प्रतिभा सक्सेना

Pratibha Saxena

Romantic Landscape

Paired Painting

Romantic Landscape

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Bal-Geet carries.