№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Decking the Bride

Karuna

बहिनी का भाग

Bahini Ka Bhag

Pratibha Saxena
2 min read 5 versesभाई-बहनbrother-sisterमायका

5 verses · ~2 min

तेरी कमाई में ओ,मेरे भइया कुछ तो है बहिनी का भाग, इक नया पैसा हजार रुपैया में,बस इतना कर दे निभाव,

भौजी को गढ़वा दे हीरे के गहने,कांच की चुरियाँ मोय, मइके इतना ही मान बहुत रे,तेरी तरक्की होय. बरस में दो दिन पाऊँ वो देहरी,इतना सा मन का चाव.

ये ही बहुत रे,चिठिया पठा दे आए जो तीज-तेवहार मइया औ बाबा किसके रहे रे,भइया से मइका हमार. फिर तो ये मेरा, तेरा वही घर, जीवन का ये ही हिसाब.

माँ जाए भाई सा दूजा न कोई,दरपन सा निहछल भाव. भइया की भेंटें ऐसा लगे मइया पठवा दिहिन है प्रसाद, सुख हो या दुख,गए मौसम के, रुख पर तेरा न बदला सुभाव.

बचपन के सुख को जी लूँगी फिर से बाँधूँगी यादों की गाँठ, संबल बनेंगी रँग से भरेंगी,जब भी जिया हो उचाट. देखूँ तुझे सियरावे हिया, लागे बाबुल की छू ली छाँव.

इति

Pratibha Saxena

The Poet

प्रतिभा सक्सेना

Pratibha Saxena

Decking the Bride

Paired Painting

Decking the Bride

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Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Bahini Ka Bhag carries.