
माँ री, बुला एक बार!
Maa Ri, Bula Ek Bar!
Pratibha Saxena
5 verses · ~18 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

5 verses · ~2 min
तेरी कमाई में ओ,मेरे भइया कुछ तो है बहिनी का भाग, इक नया पैसा हजार रुपैया में,बस इतना कर दे निभाव,
भौजी को गढ़वा दे हीरे के गहने,कांच की चुरियाँ मोय, मइके इतना ही मान बहुत रे,तेरी तरक्की होय. बरस में दो दिन पाऊँ वो देहरी,इतना सा मन का चाव.
ये ही बहुत रे,चिठिया पठा दे आए जो तीज-तेवहार मइया औ बाबा किसके रहे रे,भइया से मइका हमार. फिर तो ये मेरा, तेरा वही घर, जीवन का ये ही हिसाब.
माँ जाए भाई सा दूजा न कोई,दरपन सा निहछल भाव. भइया की भेंटें ऐसा लगे मइया पठवा दिहिन है प्रसाद, सुख हो या दुख,गए मौसम के, रुख पर तेरा न बदला सुभाव.
बचपन के सुख को जी लूँगी फिर से बाँधूँगी यादों की गाँठ, संबल बनेंगी रँग से भरेंगी,जब भी जिया हो उचाट. देखूँ तुझे सियरावे हिया, लागे बाबुल की छू ली छाँव.
इति

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Decking the Bride
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Bahini Ka Bhag carries.