
ध्वनि
Dhwani
Suryakant Tripathi 'Nirala'
8 verses · ~15 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Veera
Abhi Na Hoga Mera Ant
Suryakant Tripathi 'Nirala'7 verses · ~1 min
अभी न होगा मेरा अन्त अभी-अभी ही तो आया है मेरे वन में मृदुल वसन्त- अभी न होगा मेरा अन्त
हरे-हरे ये पात, डालियाँ, कलियाँ कोमल गात!
मैं ही अपना स्वप्न-मृदुल-कर फेरूँगा निद्रित कलियों पर जगा एक प्रत्यूष मनोहर
पुष्प-पुष्प से तन्द्रालस लालसा खींच लूँगा मैं, अपने नवजीवन का अमृत सहर्ष सींच दूँगा मैं,
द्वार दिखा दूँगा फिर उनको है मेरे वे जहाँ अनन्त- अभी न होगा मेरा अन्त।
मेरे जीवन का यह है जब प्रथम चरण, इसमें कहाँ मृत्यु? है जीवन ही जीवन अभी पड़ा है आगे सारा यौवन स्वर्ण-किरण कल्लोलों पर बहता रे, बालक-मन,
मेरे ही अविकसित राग से विकसित होगा बन्धु, दिगन्त; अभी न होगा मेरा अन्त।
इति
The Poet
Suryakant Tripathi 'Nirala'

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Abhi Na Hoga Mera Ant carries.