№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Veera

अभी न होगा मेरा अन्त

Abhi Na Hoga Mera Ant

Suryakant Tripathi 'Nirala'
1 min read 7 versesआत्मविश्वासself-confidenceवसन्त

7 verses · ~1 min

अभी न होगा मेरा अन्त अभी-अभी ही तो आया है मेरे वन में मृदुल वसन्त- अभी न होगा मेरा अन्त

हरे-हरे ये पात, डालियाँ, कलियाँ कोमल गात!

मैं ही अपना स्वप्न-मृदुल-कर फेरूँगा निद्रित कलियों पर जगा एक प्रत्यूष मनोहर

पुष्प-पुष्प से तन्द्रालस लालसा खींच लूँगा मैं, अपने नवजीवन का अमृत सहर्ष सींच दूँगा मैं,

द्वार दिखा दूँगा फिर उनको है मेरे वे जहाँ अनन्त- अभी न होगा मेरा अन्त।

मेरे जीवन का यह है जब प्रथम चरण, इसमें कहाँ मृत्यु? है जीवन ही जीवन अभी पड़ा है आगे सारा यौवन स्वर्ण-किरण कल्लोलों पर बहता रे, बालक-मन,

मेरे ही अविकसित राग से विकसित होगा बन्धु, दिगन्त; अभी न होगा मेरा अन्त।

इति

Suryakant Tripathi 'Nirala'

The Poet

सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला

Suryakant Tripathi 'Nirala'

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Abhi Na Hoga Mera Ant carries.