
इक लम्हा ख़ुशी के लिये दुनिया सफ़र में है
Ik Lamha Khushi Ke Liye Duniya Safar Mein Hai
Amitabh Tripathi ‘Amit’
7 verses · ~12 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

5 verses · ~1 min
आज ज़रा फ़ुर्सत पाई थी आज उसे फिर याद किया बंद गली के आख़िरी घर को खोल के फिर आबाद किया
खोल के खिड़की चाँद हँसा फिर चाँद ने दोनों हाथों से रंग उड़ाए फूल खिलाए चिड़ियों को आज़ाद किया
बड़े बड़े ग़म खड़े हुए थे रस्ता रोके राहों में छोटी छोटी ख़ुशियों से ही हम ने दिल को शाद किया
बात बहुत मामूली सी थी उलझ गई तकरारों में एक ज़रा सी ज़िद ने आख़िर दोनों को बर्बाद किया
दानाओं की बात न मानी काम आई नादानी ही सुना हवा को पढ़ा नदी को मौसम को उस्ताद किया
इति

Paired Painting
Ararat Valley
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Aaj Zara Fursat Pai Thi carries.