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Sita Abandoned

KarunaAdvanced

कारवां गुज़र गया

Karwan Guzar Gaya

Gopaldas 'Neeraj'
2 min read 5 versesLife

5 verses · ~2 min

स्वप्न झरे फूल से, मीत चुभे शूल से, लुट गये सिंगार सभी बाग़ के बबूल से, और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे!

नींद भी खुली न थी कि हाय धूप ढल गई, पाँव जब तलक उठे कि ज़िन्दगी फिसल गई, पात-पात झर गये कि शाख़-शाख़ जल गई, चाह तो निकल सकी न, पर उमर निकल गई, गीत अश्क़ बन गए, छंद हो दफ़न गए, साथ के सभी दिऐ धुआँ-धुआँ पहन गये, और हम झुके-झुके, मोड़ पर रुके-रुके उम्र के चढ़ाव का उतार देखते रहे कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे।

क्या शबाब था कि फूल-फूल प्यार कर उठा, क्या सुरूप था कि देख आइना मचल उठा इस तरफ जमीन और आसमां उधर उठा, थाम कर जिगर उठा कि जो मिला नज़र उठा, एक दिन मगर यहाँ, ऐसी कुछ हवा चली, लुट गयी कली-कली कि घुट गयी गली-गली, और हम लुटे-लुटे, वक्त से पिटे-पिटे, साँस की शराब का खुमार देखते रहे कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे।

हाथ थे मिले कि जुल्फ चाँद की सँवार दूँ, होंठ थे खुले कि हर बहार को पुकार दूँ, दर्द था दिया गया कि हर दुखी को प्यार दूँ, और साँस यूँ कि स्वर्ग भूमी पर उतार दूँ, हो सका न कुछ मगर, शाम बन गई सहर, वह उठी लहर कि दह गये किले बिखर-बिखर, और हम डरे-डरे, नीर नयन में भरे, ओढ़कर कफ़न, पड़े मज़ार देखते रहे कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे!

माँग भर चली कि एक, जब नई-नई किरन, ढोलकें धुमुक उठीं, ठुमक उठे चरण-चरण, शोर मच गया कि लो चली दुल्हन, चली दुल्हन, गाँव सब उमड़ पड़ा, बहक उठे नयन-नयन, पर तभी ज़हर भरी, ग़ाज एक वह गिरी, पुंछ गया सिंदूर तार-तार हुई चूनरी, और हम अजान से, दूर के मकान से, पालकी लिये हुए कहार देखते रहे। कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे।

इति

Gopaldas 'Neeraj'

The Poet

गोपालदास "नीरज

Gopaldas 'Neeraj'

Sita Abandoned

Paired Painting

Sita Abandoned

This deeply poignant work captures one of the most heartbreaking moments in the Ramayana, when the noble queen Sita finds herself alone and banished in the deep wilderness. Archibald Herman Muller, a master of blending Western academic oil techniques with Indian mythological subjects, portrays Sita not merely as a mythological archetype, but as a living, breathing woman grappling with sudden isolation. Her delicate hands rest gently on the forest floor, and her sorrowful gaze lifts upward in quiet petition. The surrounding dense, shadowy woods mirror the profound solitude of her exile, yet a subtle warmth emanates from her figure, symbolizing her enduring inner purity and spiritual grace.

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